Madhushala Hardcover – 7 Jun 1997

Madhushala Hardcover – 7 Jun 1997

99
27% OFF 135.0
  • 64 Views
  • 1 Comments
  • Reasons

    Vote down Reasons

    • Other reasons : 1
    • Product not good/not worth the price : 1
Cropped6757550990338827635
Deal Newbie
159
63
2

https://www.amazon.in/Madhushala-Harivansh-Rai-...
हरिवंशराय ‘बच्चन’ की अमर काव्य-रचना मधुशाला 1935 से लगातार प्रकाशित होती आ रही है। सूफियाना रंगत की 135 रुबाइयों से गूँथी गई इस कविता क हर रुबाई का अंत ‘मधुशाला’ शब्द से होता है। पिछले आठ दशकों से कई-कई पीढि़यों के लोग इस गाते-गुनगुनाते रहे हैं। यह एक ऐसी कविता है] जिसमें हमारे आसपास का जीवन-संगीत भरपूर आध्यात्मिक ऊँचाइयों से गूँजता प्रतीत होता है।

Expiring In 4 days
Missing