“कभी बेपनाह बरस पडी...कभी गुम सी है..., यह बा...

“कभी बेपनाह बरस पडी...कभी गुम सी है..., यह बारिश भी ,कुछ-कुछ तुम सी है..! ;) ;)

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“कभी बेपनाह बरस पडी…कभी गुम सी है…,

यह बारिश भी जानेमन ,कुछ-कुछ तुम सी है..! https://cdn2.desidime.com/assets/textile-editor/icon_wink.gif https://cdn2.desidime.com/assets/textile-editor/icon_wink.gif

547 Comments  |  
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❛लफ्ज़ों के इत्तेफाक में
बदलाव कर के देख…

तू देख कर न मुस्कुरा
बस मुस्कुरा के देख…❜

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क्या हसीन इत्तेफाक़ था तेरी गली में आने का,

किसी काम से आये थे, किसी काम के ना रहे

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काँलेज के सुचनापटल पर एक सुविचार लिखा था…

पेड़ पर अपनी गर्लफ्रेंड़ का नाम लिखने से अच्छा है उसके नाम का एक पेड़ लगायें…!!!
🌴🌾
फिर मैने
गर्लफ्रेंड्स की लिस्ट तैयार की
😂😜
आखिर मे
4 एकड़ का खेत लेकर
गन्ने की फसल बो दी
🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱
😄😆😂😜

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रस्सी जैसी जिंदगी..
…..तने-तने हालात है…..
एक सिरे पे ख़्वाहिशें…
….दूजे पे औकात है….!!

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जख्म तो हम भी अपने दिल में तुमसे गहरे रखते हैं ,
मगर हम जख्मों पे मुस्कुराहटों के पहरे रखते हैं !!!

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जिनकी शादी में
‘अजीमोशाह शहंशाह’
वाला गाना बजा था..

अब उनको सुबह सुबह बरमुंडा पहन कर दूध लेने जाते देखता हूँ
तो दिल भर आता हैं".😆😆😆

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क़यामत का तो सुना था के कोई किसी का ना होगा,,
मगर अब तो दुनिया में भी ये रिवाज़ आम हो गया है

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ज़मीं पर रह कर आसमां को छूने की फितरत है मेरी,
पर गिरा कर किसी को ऊपर उठने का शौक़ नहीं मुझे.

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सबसे रोमांटिक जगह मेरे घर की दीवार पे टंगी घड़ी है….
जहाँ दोनों कांटे सारा दिन एक दूसरे के पीछे घूमते रहते

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Alpha sir tofha kabool kareye 🙇

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कभी ख़ामोशी बनते हैं
कभी आवाज़ बनते हैं,
हर तन्हाई के साथी,
मेरे जज्बात बनते हैं।

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" जिसको मिला हैं समंदर की गहराईयों से मिला हैं…

लाज़वाब मोती किसी को किनारे पर नही मिलते….."👍🏻🙏🏻

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पुराने जमाने में

मोबाइल टेक्नोलॉजी के इजाद होने से पहले

छींकों और हिचकियों को मिस कॉल समझा जाता था।?

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मेरे नसीब की बारिश कुछ इस तरह से होती रही मुझपे कि ख्वाहिशे सुखती रही और मेरी पलके भीगती रही.

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कभी जो थक जाओ तुम दुनिया की महफिलों से
हमें आवाज दे देना, हम अकसर अकेले होते हैं

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सबसे रोमांटिक जगह मेरे घर की दीवार पे टंगी घड़ी है….
जहाँ दोनों कांटे सारा दिन एक दूसरे के पीछे घूमते रहते

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आज कल वो हमसे डिजिटल नफरत करते हैं,,,

हमें ऑनलाइन देखते ही ऑफलाइन हो जाते हैं
..😜😂

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कितना अजीब होता है महफ़िल में बिदाई का आलम !
उठ के वो भी चल देते है, जिनका कोई घर नहीं होता !!

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रह गयी जाम में अंगड़ाइयां ले ले के शराब..
हमसे मांगी ना गयी
उनसे पिलाई ना गयी
🌹🌹🌹🌹🌹

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मुकद्दर में लिखा के लाये हैं
दर- ब- दर भटकना..
मौसम कोई भी हो
परिंदे परेशान ही रहते हैं..

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जिंदगी के किसी मोड़ पर अगर वो लौट भी
आये तो क्या है,

वो लम्हात, वो जज्बात, वो अंदाज, तो अब

ना लौटेंगे कभी… ☺

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मेरे नसीब की बारिश कुछ इस तरह से होती रही मुझपे कि ख्वाहिशे सुखती रही और मेरी पलके भीगती रही.

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कर दुवा ये मेरे दिल… सभी के लिए..!!!
के आदमी जी सके… आदमी के लिए..!!

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I suppose Hindi is not allowed or translation has to be done in DD, else user will be banned. Please convert to English for all of us to understand.

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@srini1973 wrote:

I suppose Hindi is not allowed or translation has to be done in DD, else user will be banned. Please convert to English for all of us to understand.


Sorry dear , I Dont have any option
My anglish is week, year, decade.

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पीता हूँ जितनी उतनी ही बढ़ती है तिश्नगी,

साक़ी ने जैसे प्यास मिला दी शराब में।।

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तुम्ही शर्त ए ताल्लुक़ तय करो हम क्या बताएंगे;

तुम्हारे पास दरिया है हमारे साथ प्यासे है।

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वो बर्फ़ का शरीफ टुकड़ा जाम में क्या गिरा…….

धीरे धीरे, खुद-ब-खुद शराब हो गया…….!!!

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उल्टी पड़ी है, कश्तियाँ रेत पर मेरी…!

कोई ले गयी है, दिल से समंदर निकाल कर…✍🏻

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